
वाराणसी, 29 नवम्बर 2025
एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भाव को जीवंत करते हुए काशी–तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत आज वाराणसी के ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर “वणक्कम काशी — चित्रकला प्रतियोगिता” का भव्य और उत्साहपूर्ण आयोजन सम्पन्न हुआ। घाट की पवित्र पृष्ठभूमि पर कला के रंगों के माध्यम से काशी और तमिल संस्कृति की गहन एकात्मता अद्भुत रूप से प्रकट हुई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तर और दक्षिण भारत — विशेष रूप से काशी और तमिलनाडु के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को सृजनात्मक रूप से अभिव्यक्त करना था। प्रतियोगिता का विषय “काशी और तमिलनाडु की समृद्ध संस्कृतियों का उत्सव” प्रतिभागियों के लिए कल्पना और परंपरा के सेतु को चित्रों में ढालने का अनोखा अवसर लेकर आया।
चित्रों में प्रतिभागियों ने
- काशी विश्वनाथ मंदिर
- मेनाक्षी अम्मन मंदिर
- नटराज स्वरूप
- भरतनाट्यम
- काशी के घाट
- द्रविड़ स्थापत्य एवं बनारसी बुनकरी परंपरा
को आकर्षक शैली और अभिव्यक्ति के साथ उकेरा। हर चित्र जैसे काशी और तमिल की साझा सांस्कृतिक यात्रा का संगीत सुनाता हुआ प्रतीत हो रहा था।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. महेश सिंह (सह-प्रोफेसर, दृश्य कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) एवं डॉ. सुनील पटेल (सहायक प्रोफेसर, दृश्य कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) ने इस पहल को दो प्राचीन सभ्यताओं के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मेल को समझने का सबसे सुंदर और प्रभावी माध्यम बताया।
दर्शकों और देश–विदेश से आए पर्यटकों ने चित्रकला के इस अनूठे संगम को अत्यंत सराहा।
प्रतियोगिता के परिणाम आगामी दिवस घोषित किए जाएंगे और विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई कि इस प्रकार की सृजनात्मक पहलें युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक, गर्वपूर्ण और संलग्न बनाएंगी तथा काशी–तमिल संगमम् 4.0 के संदेश को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


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