
वाराणसी। शिवपुर स्थित गुरु नानक स्कूल के कैंपस में आयोजित काशी सांसद सांस्कृतिक नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में कला और सामाजिक जागरूकता का शानदार संगम देखने को मिला। प्रतियोगिता में लगभग 15 टीमों और एकल कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज से जुड़े विविध मुद्दों पर संदेश दिया।
प्रतियोगिता में सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति वरुणा पार ज़ोन के रंगकर्मी डॉ. लियाकत अली जलज की रही, जिन्होंने भ्रूण हत्या, प्रदूषण और विकास की दौड़ में मानवता पर पड़ रहे प्रभाव को केंद्र में रखते हुए एकल नाटक प्रस्तुत किया।
गहन अभिनय, सशक्त संवाद अदायगी और विषय की गंभीरता ने दर्शकों और निर्णायक मंडल को गहराई से प्रभावित किया। प्रस्तुति पूरी होते ही सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वाराणसी के मेयर श्री अशोक तिवारी ने डॉ. लियाकत अली जलज को जनपद स्तर पर प्रथम स्थान का प्रमाण पत्र एवं गोल्ड मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।
वरिष्ठ भाजपा नेता अरविंद सिंह ने भी उन्हें बधाई दी और कहा कि — “समाज के संवेदनशील विषयों को मंच तक लाने वाले कलाकार ही परिवर्तन की नींव रखते हैं।”
कार्यक्रम में विभिन्न टीमों द्वारा नाटक प्रस्तुत किए गए जिनमें —
काशी विद्यापीठ टीम — “विकसित भारत 2047”
नेहा एंड ग्रुप — “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”
खुशी ग्रुप — अग्रसेन कन्या विद्यालय की जिज्ञासा द्वारा एकल प्रस्तुति
मधु सिंह, रागनी विश्वकर्मा, संगीता कुमारी — “मोबाइल ले डूबा”
शालिनी ग्रुप — बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक बोझ और आत्महत्या की समस्या
एकल नाटक में अग्रसेन कॉलेज की बालिका जिज्ञासा की प्रस्तुति भी सराहनीय रही।
मेयर अशोक तिवारी द्वारा पुरस्कृत कलाकारों में — अनुराधा कुमारी, भानु प्रताप, रंजना सोनकर, संस्कृति दूबे, प्रदीप, आरव, शालिनी कुमारी, गौरव मणि, नीरज स्मार्ट सिटी स्कूल की प्राचार्या रीता यादव भी सम्मान सूची में शामिल रहीं।
निर्णायक मंडल में —ध्रुव सिंह चौहान, प्रो. अरुण जैन और नाट्य गुरु डॉ. शुभ्रा वर्मा शामिल रहीं।
इस दौरान डॉ. शुभ्रा वर्मा ने कहा कि — “रिकॉर्डिंग और AI रिकॉर्डिंग बच्चों के अभिनय विकास में बाधक हैं। संवाद ही नाटक की आत्मा है — अध्यापक बच्चों से संवाद बुलवाकर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएं।” आयोजन प्रबंधन में —
विभोर रघुवंशी, डॉ. शशी भूषण त्रिपाठी, पूर्वा विक्रम और आरती गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का सफल संचालन रत्नेश कुमारी पांडेय ने किया। डॉ. लियाकत अली जलज की यह उपलब्धि काशी की सांस्कृतिक पहचान, रंगमंच और सामाजिक सरोकार को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करती है।
उनकी प्रस्तुति यह संदेश देती है कि —
कला सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।


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